दमोह: शहर के मध्य स्थित, दमोह का सबसे बड़ा और व्यस्ततम बाज़ार, जहाँ प्रतिदिन लगभग 5,000 से अधिक लोग रोज़मर्रा की ज़रूरतों की ख़रीदी के लिए आते हैं, आज गंदगी और अव्यवस्था का पर्याय बन चुका है। यह बाज़ार, जो शहर की आर्थिक धुरी माना जाता है, वर्तमान में ख़राब साफ़-सफ़ाई के कारण सुर्खियों में है।
स्थानीय निवासियों और दुकानदारों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण बाज़ार में साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था पूरी तरह से चरमरा गई है। जगह-जगह कूड़े के ढेर और जलजमाव के कारण बाज़ार में गंदगी का अंबार लगा रहता है।
महिलाओं को हो रही ख़ास परेशानी
इस गंदगी का सबसे ज़्यादा सामना उन महिलाओं को करना पड़ रहा है, जो बड़ी संख्या में ख़रीदी के लिए बाज़ार आती हैं। गंदगी इतनी ज़्यादा है कि लोगों को बाज़ार से निकलने में भी भारी कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है।
एक नियमित ख़रीदार ने अपनी पहचान न बताते हुए कहा, “हमें रोज़ाना इस गंदगी से होकर गुज़रना पड़ता है। कपड़ों और जूतों के ख़राब होने का डर तो रहता ही है, साथ ही बीमारियों का खतरा भी बना रहता है। प्रशासन को इस ओर तुरंत ध्यान देना चाहिए।”
प्रशासन के नियंत्रण में होने के बावजूद दुर्दशा
यह बाज़ार सीधे तौर पर स्थानीय प्रशासन के नियंत्रण में आता है, जिसके कारण नागरिकों में और भी ज़्यादा रोष है। लोगों का सवाल है कि प्रशासन की निगरानी वाले क्षेत्र में ही यदि साफ़-सफ़ाई की यह हालत है, तो अन्य क्षेत्रों की स्थिति क्या होगी?
नागरिकों ने ज़िला प्रशासन से इस समस्या पर तत्काल संज्ञान लेने और बाज़ार में साफ़-सफ़ाई की व्यवस्था को स्थायी रूप से सुधारने की माँग की है, ताकि बाज़ार आने वाले हज़ारों लोगों को रोज़ाना की इस परेशानी से मुक्ति मिल सके।