20 साल से नौकरी से गायब रही महिला शिक्षिका सेवा में लौटने की मांग लेकर अचानक रीवा मेडिकल कॉलेज पहुंच गई। विभाग ने ज्वाइनिंग से इनकार किया तो शिक्षिका ने जबलपुर हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
सुनवाई के दौरान उसके बीमारी और फिटनेस सर्टिफिकेट में फर्जीवाड़ा सामने आया, जिससे कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया और रीवा एसपी को एफआईआर दर्ज करने के आदेश दे दिए थे। आदेश के तहत रीवा पुलिस ने आज (गुरुवार) एफआईआर दर्ज कर ली।
ऐसे खुला फरेब का मामला
दरअसल, रीवा निवासी अर्चना आर्या ने याचिका में बताया कि उन्हें 2001 में शिक्षा कर्मी वर्ग-तीन के पद पर नियुक्त किया गया था। बीमारी के कारण वे 2002 से 2018 तक सेवा से अनुपस्थित रहीं। 2018 में उन्होंने विभाग में दो प्रमाणपत्र प्रस्तुत किए, पहला- 2006 का अनफिट (बीमारी का) प्रमाणपत्र और दूसरा- 2017 का फिटनेस सर्टिफिकेट।
उन्होंने मांग की कि इन दस्तावेजों के आधार पर उनका मेडिकल अवकाश स्वीकृत कर सेवा में पुनः लिया जाए, लेकिन विभाग ने इसे खारिज कर दिया। इसके बाद अर्चना हाईकोर्ट पहुंचीं।
कोर्ट में हुआ बड़ा खुलासा
जबलपुर हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकलपीठ ने सुनवाई के दौरान पाया कि 2006 का बीमारी प्रमाणपत्र और 2017 का फिटनेस प्रमाणपत्र, दोनों पर ही रीवा मेडिकल कॉलेज के मनोरोग विभाग के एचओडी डॉ. प्रदीप कुमार के हस्ताक्षर हैं। कोर्ट ने आश्चर्य जताते हुए पूछा कि “क्या एक व्यक्ति 11 साल तक एचओडी बना रहा?”
कोर्ट ने रीवा मेडिकल कॉलेज डीन डॉ. सुनील अग्रवाल से जवाब मांगा। उन्होंने बताया गया कि कॉलेज में मनोरोग विभाग का गठन वर्ष 2009 में हुआ, जबकि 2006 में यह विभाग अस्तित्व में ही नहीं था।
फर्जी हस्ताक्षर करने वालों पर कार्रवाई के आदेश
इस खुलासे के बाद कोर्ट ने कहा कि यह स्पष्ट फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी का मामला है। कोर्ट ने रीवा एसपी को निर्देश दिया कि फर्जी हस्ताक्षर करने वाले के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए और 15 दिन में रिपोर्ट पेश की जाए।
कोर्ट ने यह भी माना कि शिक्षिका की 15 साल की गैरहाजिरी नौकरी से हटाने के लिए पर्याप्त कारण है। इस आधार पर कोर्ट ने अर्चना आर्या की याचिका खारिज कर दी।
एडिशनल एसपी आरती सिंह ने बताया कि कोर्ट ने पाया है कि दोनों प्रमाणपत्र एक ही व्यक्ति के हस्ताक्षर से जारी किए गए हैं। फर्जीवाड़े की पुष्टि के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है।
महिला की मदद करने वाले डॉक्टर पर भी होगी कार्रवाई
एसपी शैलेंद्र सिंह का कहना है कि अब उस डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, जिसने इस फर्जीवाड़े में महिला की मदद की। पुलिस अभी साक्ष्य जुटा रही है।