रीवा जिले में अब कोई भी किसान खेतों में नरवाई नहीं जला सकेगा। पर्यावरण प्रदूषण और मिट्टी की उर्वरता बचाने के लिए कलेक्टर प्रतिभा पाल ने नरवाई जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। आदेश का उल्लंघन करने पर किसानों पर जुर्माना और प्रकरण दर्ज किया जाएगा। यह आदेश 13 नवंबर से पूरे जिले में लागू है।
आदेश के मुताबिक, दो एकड़ से कम जमीन वाले किसानों पर ₹2500, दो से पांच एकड़ वाले पर ₹5000 और पांच एकड़ से ज्यादा वाले पर ₹15000 का जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 223 के तहत प्रकरण दर्ज कर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हार्वेस्टर में स्ट्रारीपर अनिवार्य
अब जिले में कोई भी हार्वेस्टर स्ट्रारीपर के बिना खेत में फसल नहीं काट सकेगा। जिन मशीनों में अवशेष प्रबंधन सिस्टम नहीं होगा, उन्हें काम करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। जिला परिवहन अधिकारी को इसकी निगरानी की जिम्मेदारी दी गई है।
कलेक्टर ने बताया कि नरवाई जलाने से मिट्टी के सूक्ष्मजीव और जैविक कार्बन नष्ट हो जाते हैं। इससे मिट्टी कठोर हो जाती है और उसकी जल धारण क्षमता घट जाती है। इसलिए खेतों में आग लगाने के बजाय किसानों को फसल अवशेष का उपयोग चारे, खाद या औद्योगिक ईंधन के रूप में करने की सलाह दी गई है।
समिति निगरानी करेगी
आदेश के पालन के लिए अपर कलेक्टर की अध्यक्षता में जिला स्तरीय समिति बनाई गई है। सभी अनुभागों में एसडीएम की अध्यक्षता में उप-समितियाँ गठित की गई हैं। पटवारी और कृषि विस्तार अधिकारी मिलकर नरवाई जलाने की घटनाओं की रिपोर्ट तहसीलदार को देंगे। तहसीलदार किसानों की सुनवाई कर रिपोर्ट एसडीएम के माध्यम से आगे भेजेंगे।
NGT के निर्देशों का भी पालन
आदेश में कहा गया है कि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल और पर्यावरण विभाग के 2017 के नोटिफिकेशन में भी नरवाई जलाने पर रोक और जुर्माने का प्रावधान है। इन निर्देशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा।
