दमोह जिले की पथरिया नगर पंचायत में आर्थिक अनियमितताओं की जांच के लिए शुक्रवार को भोपाल से विशेष टीम पहुंची। जांच दल ने नगर पंचायत कार्यालय पहुंचकर ज़रूरी दस्तावेजों को खंगालना शुरू कर दिया है।
यह जांच करीब दो दिन तक चल सकती है। इस मामले के शिकायतकर्ता और वार्ड नंबर 6 से पूर्व पार्षद प्रीतम पटेल ने नगर पंचायत में बड़े भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं।
पटेल के अनुसार, ये अनियमितताएं हुईं
- पीएम आवास घोटाला: 2,300 पात्र हितग्राहियों में से मात्र 15-20 लोगों के नाम पर आवास के लाखों रुपए की दूसरी किस्त डाल दी गई और उसकी बंदरबांट कर ली गई।
- मकान बने बिना राशि जारी: कुछ हितग्राहियों को पीएम आवास की पूरी राशि ढाई लाख रुपए दे दी गई, जबकि उनके मकान बने ही नहीं हैं।
- दुकान निर्माण और नीलामी में गड़बड़ी: श्मशान के पास 32 दुकानें बनाई ही नहीं गईं, लेकिन 33 दुकानें नीलाम कर दी गईं।
- बिना टेंडर खरीदी: एक ट्रैक्टर ऑफलाइन खरीदा गया, जबकि ₹2 लाख से ऊपर की खरीदी के लिए टेंडर जारी करना अनिवार्य है।
- शौचालय भुगतान पर संदेह: 2015 में 1,308 शौचालयों का भुगतान किया गया, जिसका भौतिक सत्यापन कराया जाना ज़रूरी है।
जांच को प्रभावित करने का आरोप
जांच टीम के आने की खबर मिलते ही पूर्व नगर पंचायत अध्यक्ष कृष्णा सिंह के पति और वार्ड पार्षद लक्ष्मण ठाकुर नगर पंचायत कार्यालय पहुंचे। उन पर अध्यक्ष के चेंबर में बैठकर कुछ फाइलें देखने और जांच प्रभावित करने की कोशिश का आरोप लगा है।
लक्ष्मण ठाकुर ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि वह विधि विभाग के सभापति हैं। जांच टीम को जवाब देने के लिए उनका वहां उपस्थित रहना आवश्यक है। उन्होंने खुद को जांच का समर्थक बताते हुए कहा कि सभी दस्तावेज लिखित में हैं। उन्होंने पलटवार करते हुए शिकायतकर्ता पर भी अपने भाई को नगर पंचायत में नौकरी दिलवाने और तीन भाइयों के नाम पर आवास स्वीकृत कराकर मकान न बनाने का आरोप लगाया।
सीएमओ ने जताई अनभिज्ञता
मामले में जब नगर पंचायत सीएमओ रितु पुरोहित से जांच टीम के आने और लक्ष्मण ठाकुर के चेंबर में मौजूद रहने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने अनभिज्ञता जाहिर की। जांच दल की अधिकारी हिमांशु भट्ट ने बताया कि वे आर्थिक अनियमितताओं से जुड़े मामलों की जांच के लिए आए हैं।
उन्होंने कहा कि अभी जांच प्रारंभिक दौर में है, इसलिए कुछ नहीं कहा जा सकता। जांच पूरी होने के बाद सभी आवश्यक दस्तावेज ले जाकर एक रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जो शासन को सौंपी जाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।