राज्य सरकार द्वारा जल शुल्क को वार्षिक से मासिक जमा प्रणाली बदलने के आदेश के खिलाफ उठे जनविरोध के बाद नागरिकों को राहत मिली है। जबलपुर महापौर ने कहा कि मासिक रूप से जल शुल्क जमा करना अनिवार्य नहीं होगा। नागरिक चाहें तो अप्रैल या सितंबर में छह महीने या पूरे वर्ष का शुल्क एकमुश्त जमा कर सकते हैं और इस पर पेनल्टी नहीं लगेगी।
जल शुल्क पोर्टल लागू, लोगों में नाराजगी
सरकार ने हाल ही में पूरे प्रदेश के 400 से अधिक नगरीय निकायों के लिए नया ‘जल शुल्क पोर्टल’ लागू किया है। इस पोर्टल में वार्षिक भुगतान की जगह मासिक भुगतान का विकल्प अनिवार्य कर दिया गया था। इसे लेकर नागरिक संगठनों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में नाराजगी बढ़ गई थी।
इंदौर, भोपाल, ग्वालियर और उज्जैन में भी इस नीति को लेकर विरोध दर्ज किया गया था। जन संगठनों ने सरकार से मांग की है कि जल शुल्क भुगतान में नागरिकों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए।
पी.जी. राज पांडे और अन्य सामाजिक संगठनों ने निर्णय का विरोध करते हुए कहा था कि सरकार द्वारा बिना सलाह लिए यह आदेश लागू करना अनुचित है। उनका कहना था कि गरीब, मध्यमवर्गीय और वरिष्ठ नागरिकों पर इसका अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा।
दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों को 25% छूट
विरोधों के बीच महापौर जगत बहादुर सिंह ने कहा किसी भी नागरिक को चिंता करने की जरूरत नहीं है। जो लोग चाहें, वे हर महीने भुगतान कर सकते हैं, या अप्रैल और सितंबर में दो किस्तों में पूरा शुल्क जमा कर सकते हैं। इस पर किसी भी तरह की पेनल्टी नहीं लगेगी। साथ ही, दिव्यांग और वरिष्ठ नागरिकों को पहले की तरह 25% की छूट मिलती रहेगी।
जल शुल्क पोर्टल राज्य स्तर से संचालित होता है और बिजली या टेलीफोन बिल की तरह इसे पारदर्शी बनाने के लिए बनाया गया है। इसका उद्देश्य नागरिकों को लचीलापन और सुविधा देना है, न कि असुविधा। जबलपुर नगर निगम इस मॉडल को जनहित मॉडल के रूप में पूरे प्रदेश में लागू करने का प्रस्ताव रखेगा, ताकि किसी भी नागरिक पर अनावश्यक पेनल्टी या भुगतान दबाव न बने।