जबलपुर हाईकोर्ट में ‘हमारे शिक्षक’ ऐप को लेकर गुरुवार को सुनवाई हुई। जिसमें सरकार की ओर से बताया गया कि प्रदेश के 73% शिक्षक ऐप का उपयोग कर रहे हैं। कोर्ट ने सरकार ने इसका रिकॉर्ड मांगा है। अब अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी। बता दें कि जबलपुर के शिक्षक मुकेश सिंह बरकड़े सहित अलग-अलग जिलों से 27 शिक्षकों ने स्कूल शिक्षा विभाग की ई-अटेंडेंस प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। शिक्षकों ने ऐप से हाजिरी लगाने में कई समस्याएं गिनाई हैं।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि ऐप से अटेंडेंस लगाने को लेकर कई तरह की परेशानी आ रही हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अंशुमान सिंह ने कोर्ट को बताया कि कई शिक्षकों के पास अच्छा स्मार्टफोन नहीं है। प्रतिमाह डाटा पैक खरीदना पड़ता है। प्रतिदिन मोबाइल की बैटरी चार्ज रखना, स्कूल में नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होने की भी समस्या है। ऐप में सर्वर और चेहरा मिलान की भी परेशानी आ रही है।
बायोमेट्रिक या उपस्थिति रजिस्टर रखने की मांग
हाईकोर्ट को यह भी बताया गया कि जो शिक्षक ऐप से अटेंडेंस लगाने में सफल नहीं हो रहे हैं, उन्हें परेशानी आ रही है। स्कूल शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी शिक्षकों का वेतन बंद करने की धमकी देकर अटेंडेंस का उपयोग करने के लिए बाध्य कर रहे हैं। शिक्षकों ने मांग की गई है कि या तो बायोमेट्रिक मशीन या फिर पूर्व की भांति कर्मचारी रजिस्टर में उपस्थिति दर्ज कराई जाए।
शिक्षकों से मांगा हलफनामा
जस्टिस एमएस भट्टी की एकल पीठ ने सभी याचिकाकर्ताओं को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा है कि क्या उन्होंने ऐप के माध्यम से अपनी उपस्थिति दर्ज करने का कोई प्रयास किया है। यदि हां तो क्या नेटवर्क कनेक्टिविटी की अनुपलब्धता के कारण वह ऐसा करने में असमर्थ रहे थे। कोर्ट ने सरकार से भी हलफनामे पर जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं के स्कूल का भी डाटा मांगा
शासन की ओर से कोर्ट को बताया गया कि प्रदेश में 73% शिक्षक ऐप के जरिए अपनी उपस्थिति दर्ज कर रहे हैं। कोर्ट ने संबंध में दस्तावेजों सहित रिकॉर्ड पेश करने के निर्देश सरकार को दिए हैं। कोर्ट ने सरकार से यह भी कहा है कि जिन स्कूलों में याचिकाकर्ता पदस्थ हैं, वहां अन्य कर्मचारी ई-अटेंडेंस लगा रहे हों, तो वह आंकड़े भी प्रस्तुत किए जाएं।