रीवा के सभी चार प्रमुख शासकीय अस्पतालों में मरीजों की सुरक्षा से खिलवाड़ किया जा रहा है। जहां व्यवस्थाओं के आभाव में लगातार मरीजों की जान खतरे में डाली जा रही है। विंध्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल संजय गांधी अस्पताल, सुपर स्पेशलिटी अस्पताल (हृदय रोग और न्यूरो का सबसे बड़ा अस्पताल) कुशाभाऊ ठाकरे जिला चिकित्सालय समेत गांधी मेमोरियल अस्पताल में भी फायर सेफ्टी का NOC नहीं है।
इन सभी अस्पतालों को नगर निगम से फायर एनओसी कई वर्षों से जारी नहीं हुई है। इस बात को लेकर नगर निगम प्रबंधन के द्वारा बार-बार अस्पताल प्रबंधन को नोटिस दी गई लेकिन किसी भी तरह की कार्यवाही अब तक नहीं की गई है। नगर निगम आयुक्त ने साफ कह दिया है कि किसी भी घटना की जवाबदारी स्वयं अस्पताल प्रबंधन की होगी।
पूरे मामले कि जानकारी देते हुए सुपर स्पेशियलिटी अधीक्षक अक्षय श्रीवास्तव ने कहा कि मेरे यहां फायर के लिए सभी तरह कि व्यवस्था उपलब्ध हैं। एक आउटसोर्स कंपनी को फायर सिस्टम की देखरेख के लिए जिम्मेदारी दी गई है। वही देखरेख करते हैं। समय-समय पर मॉकड्रिल भी करते हैं। हालांकि पाइप लाइन में पाइप क्यों नहीं है, फायर इंजीनियर ही बता पाएंगे।
वहीं इस मामले के बारे में जब उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल से बात की गई तो उनका कहना है कि हम अस्पताल प्रबंधन से बात करेंगे हो जाएगा।
मामले की जानकारी देते हुए नगर निगम आयुक्त सौरभ सोनवड़े ने बताया कि
अस्पताल प्रबंधन को कई बार फायर सेफ्टी को लेकर नोटिस दी जा चुकी है लेकिन प्रबंधन द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है। हमने लिखित में दिया है कि अगर कोई दुर्घटना होती है तो इसकी पूरी जिम्मेदारी अस्पताल प्रबंधन की होगी।

