मुआवजा राशि दिलाने प्रतिवेदन के नाम पर रिश्वत लेने वाले वन विभाग के वनपाल और वनरक्षक को अदालत ने सजा सुनाई है। प्रकरण की सुनवाई विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम शहाबुद्दीन हाशमी की कोर्ट में हुई।
न्यायालय ने सुनवाई करते हुए वनपाल आरोपी शेख हनीफ दक्षिण वन मंडल चौकी खैराना किशनगढ़ और वनरक्षक जसवंत सिंह धुर्वे दक्षिण वन मंडल चौकी सहजपुरी वेदवारा तहसील रहली को दोषी पाया और 3-3 साल के सश्रम कारावास और जुर्माने की सजा सुनाई है।
लोकायुक्त में की थी शिकायत
अभियोजन के अनुसार, आवेदक संजय कुमार कोतू ने लोकायुक्त कार्यालय सागर में शिकायत की थी। जिसमें बताया गया कि इनकी मां के नाम की जमीन में लगाई गई तिली और मूंगफली की फसल जंगली सुअरों द्वारा नष्ट कर दी थी।
उक्त नुकसान में मुआवजा के लिए तहसीलदार रहली को आवेदन किया था। तहसीलदार रहली ने वन विभाग रेंज गौरझामर से उक्त हुए नुकसान पर प्रतिवेदन चाहा गया था। लेकिन आरोपी वनपाल शेख हनीफ और वनरक्षक जसवंत सिंह धुर्वे ने प्रतिवेदन तैयार करने के एवज में 5000 रुपए की रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत मिलते ही लोकायुक्त ने जांच शुरू की। जांच में शिकायत सही पाई गई। कार्रवाई करते हुए 28 सितंबर 2021 को लोकायुक्त की टीम ने आरोपियों को 5 हजार की रिश्वत लेते हुए पकड़ा।
कोर्ट ने सुनाई 3 साल की सजा
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर जांच में लिया। जांच पूरी होने पर कोर्ट में चालान पेश किया। कोर्ट ने मामले में सुनवाई शुरू की। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने मामले से जुड़े साक्ष्य और दस्तावेज कोर्ट में पेश किए। न्यायालय ने दोनों पक्षों को सुना और साक्ष्यों के आधार पर आरोपी वनपाल और वनरक्षक को 3-3 साल के कारावास की सजा सुनाई है।
